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इनसान अपने आपको इस्लामी सिद्धांतों के अनुसार कैसे प्रशिक्षित करे (आत्म-सुधार कैसे करे), विशेषकर यह देखते हुए कि उसके अंदर ऐसी धार्मिक कमियाँ होती हैं जिनके बारे में अल्लाह ही जानता है?
इस्लाम में आत्म-प्रशिक्षण (या आत्म-सुधार) के कुछ साधन ये हैं : 1. अल्लाह की इबादत करना, उसके साथ संपर्क बनाए रखना और उसके प्रति समर्पित होना। 2. क़ुरआन की अधिक से अधिक तिलावत करना, उसके अर्थ पर चिंतन करना और उसके गहरे रहस्यों पर विचार करना। 3. धार्मिक उपदेश वाली लाभकारी किताबें पढ़ना। 4. शैक्षिक कार्यक्रमों में शामिल होना, जैसे कि धार्मिक पाठ और व्याख्यान 5. अपने समय की रक्षा करना और उसका उपयोग उन कार्यों में करना जिनसे व्यक्ति को इस दुनिया और परलोक—दोनों में लाभ हो। 6. जायज़ सुख-सुविधाओं में अत्यधिक लिप्त होने से बचना और उन पर अनावश्यक ध्यान देने से परहेज़ करना। 7. नेक संगत अपनाना और सदाचारी दोस्तों को खोजना। 8. ज्ञान को अमल में लाना, जो कुछ सीखा है उसे व्यावहारिक रूप से लागू करना। 9. अपना कठोर और सटीक आत्म-मूल्यांकन करना (अपना मुहासबा करना)। 10. सर्वशक्तिमान अल्लाह पर भरोसा रखने के साथ, आत्मविश्वास बनाए रखना। 11. अल्लाह सर्वशक्तिमान की खातिर अपने नफ़्स से अप्रसन्न होना और उसे तुच्छ समझना; यह पिछले बिंदु के विपरीत नहीं है, क्योंकि व्यक्ति को नेक कर्म करते रहना चाहिए, लेकिन साथ ही यह भी समझना चाहिए कि उसके भीतर अभी भी कमियाँ और कोताहियाँ मौजूद हैं। 12. "शरई एकांतता" अपनाना : अर्थात् मनुष्य हर समय लोगों के साथ घुला-मिला न रहे और न ही अपना सारा समय सामाजिक मेलजोल में बिताए, बल्कि वह अपने लिए कुछ ऐसे विशेष समय निर्धारित करे जिन्हें वह अल्लाह की इबादत और शरई तौर पर वैध एकांत (ख़लवत) के लिए समर्पित करे।
हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान केवल अल्लाह तआला के लिए योग्य है।.
आदमी का अपने अंदर की कमी को पहचानना, आत्म-सुधार की प्रक्रिया का सबसे पहला कदम है। जो व्यक्ति अपनी कमी को जान लेता है, वह वास्तव में आत्म-सुधार के मार्ग पर अपना कदम बढ़ा चुका होता है। यह समझ (कि मुझमें कमी है) इनसान को अपने आपको सुधारने और इस रास्ते पर तेज़ी से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। यह ज्ञान इनसान को आत्म-सुधार से रोकता नहीं, बल्कि उसे आगे बढ़ाता है। इसके अलावा, अल्लाह की तरफ़ से बंदे के लिए सबसे बड़ी तौफ़ीक़ यह है कि वह अपने अंदर बदलाव और सुधार (आत्म-विकास) की कोशिश करे। जैसा कि अल्लाह तआला ने फ़रमाया : إن الله لا يغير ما بقوم حتى يغيروا ما بأنفسهم "निश्चित रूप से, अल्लाह किसी कौम की हालत तब तक नहीं बदलता, जब तक वे खुद अपने अंदर बदलाव न ले आएँ।" इसलिए जो व्यक्ति अल्लाह के लिए अपने आपको बदलता है, तो अल्लाह भी उसकी हालत को बेहतर कर देता है।
हर इनसान की अपने प्रति व्यक्तिगत और निजी ज़िम्मेदारी होती है; उससे एक व्यक्ति के तौर पर ही जवाब-तलबी की जाएगी और पूछताछ की जाएगी। जैसा कि सर्वशक्तिमान अल्लाह का फरमान है :
إِنْ كُلُّ مَنْ فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ إِلَّا آتِي الرَّحْمَانِ عَبْدًا لَقَدْ أَحْصَاهُمْ وَعَدَّهُمْ عَدًّا وَكُلُّهُمْ آتِيهِ يَوْمَ الْقِيَامَةِ فَرْدًا (93-95)
سورة مريم.
"आकाशों तथा धरती में जो कोई भी है, वह रहमान (परम दयालु अल्लाह) के पास दास के रूप में आने वाला है। निश्चय उसने उन्हें (अपने ज्ञान के साथ) घेर रखा है तथा उन्हें अच्छी तरह गिन रखा है। और उनमें से हर एक क़ियामत के दिन उसके पास अकेला आने वाला है।" (सूरत मरयमः 93–95)।
इसके अतिरिक्त, कोई भी इनसान उसे दी गई भलाई से तब तक सही मायने में लाभ नहीं उठा सकता, जब तक कि उसके साथ उसका अपना खुद से शुरू किया गया प्रयास शामिल न हो।
क्या तुम नूह (अलैहिस्सलाम) की पत्नी और लूत (अलैहिस्सलाम) की पत्नी को नहीं देखते, कि वे दोनों नबियों के घर में रहती थीं, जिनमें से एक ‘ऊलुल-अज़्म’ (दृढ़ संकल्प वाले पैगंबरों) में से थे। ज़रा — मेरे भाई — कल्पना कीजिए कि एक पैगंबर ने अपनी पत्नी को मार्गदर्शन देने में कितना ज़बरदस्त प्रयास किया होगा; निःसंदेह उन्हें आध्यात्मिक शिक्षा का एक बड़ा हिस्सा मिला होगा। लेकिन जब उनकी तरफ़ से ख़ुद की कोई पहल नहीं हुई, तो उनसे कहा गया: ادْخُلَا النَّارَ مَعَ الدَّاخِلِين “तुम दोनों जहन्नम में प्रवेश कर जाओ, प्रवेश करने वालों के साथ।” (सूरत अत-तहरीम : 10)
इसके विपरीत, फ़िरऔन की पत्नी — हालाँकि वह इतिहास के सबसे बड़े अपराधियों में से एक के घर में थी — अल्लाह ने उसे ईमान वालों के लिए मिसाल (आदर्श) बना दिया, क्योंकि उसके अंदर अपनी ओर से आत्मिक जागरुकता, आत्म-प्रशिक्षण और आत्म-सुधार था।
मुसलमान के अपने आपको प्रशिक्षित करने और संवारने के ये महत्वपूर्ण साधन हैं :
हम अल्लाह से दुआ करते हैं कि वह हमारी अपने नफ़्स (अपने आप) पर काबू पाने में मदद करे और उसे उन सभी कामों के प्रति आज्ञाकारी बना दे जिन्हें वह पसंद करता है और जिनसे वह प्रसन्न होता है। तथा अल्लाह हमारे पैगंबर मुहम्मद पर, तथा उनके परिवार और साथियों पर अपनी रहमत और शांति बरसाए।
अधिक लाभ के लिए, इन उत्तरों को भी देखें : (27082), (21215), (147626).
और अल्लाह तआला ही सबसे अधिक ज्ञान रखता है।